जयप्रकाशजी : समाजसेवा और निर्माण क्षेत्र के अग्रणी प्रेरणास्त्रोत

    03-Apr-2025
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jay 
 
जयप्रकाशजी न केवल अग्रवाल समाज के एक प्रतिष्ठित उद्योगपति थे, बल्कि सामाजिक एकता और सेवा के प्रतीक भी थे. ब्रदरहुड फाउंडेशन की स्थापना से लेकर पुणे में कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने तक उन्होंने समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उनकी सादगी, मिलनसार स्वभाव और सभी को साथ लेकर चलने की सोच ने उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाया. उनके मार्गदर्शन से न केवल कई नए व्यवसाय फले-फूले, बल्कि अग्रवाल समाज में भाईचारे और परोपकार की भावना भी मजबूत हुई. उनका निधन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनके आदर्श और योगदान हमेशा याद किए जाएंगे. यह भावनात्मक श्रद्धांजलि अग्रवाल समाज के गणमान्यों ने व्यक्त की.
   
 बड़े भाई की परछाई मुझसे दूर हो गई
 
 
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मैं मानता था कि जयप्रकाशजी मेरे बड़े भाई जैसे थे. वे एक बहुत ही सरल और अच्छे स्वभाव वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे. ऐसा व्यक्ति दुर्लभ होता है. मैं उन्हें 1971 से जानता था. उस समय नाना पेठ में मेरा तेल का कारोबार था. इंजीनियर जयप्रकाशजी ने पुणे आने के बाद एक केमिकल फैक्ट्री भी शुरू की और बाद में जेजे बिल्डर नाम से कंस्ट्रक्शन व्यवसाय में काम करना शुरू किया. हमेशा शांत और अच्छा स्वभाव रहा. वे अयादा बातें नहीं करते थे. 1998 में जब उन्होंने ब्रदरहुड फाउंडेशन की स्थापना की थी तब मैं उनके साथ था. उन्होंने पूरे परिवार की प्रगति में योगदान दिया. मैं महसूस करता हूं कि उनका इस दुनिया से चले जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है. मुझे ऐसा लग रहा है कि बड़े भाई की परछाई मुझसे दूर हो गई है. इससे अग्रवाल समाज को भी भारी नुकसान हुआ है.
 
- ईेशरचंद गोयल, अध्यक्ष, अग्रवाल समाज, पुणे
 
 
 बेहद सटीक और अच्छी बातें करते थे
 
 
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जयप्रकाशजी हमारे समाज के एक महान सामाजिक कार्यकर्ता थे. उन्होंने ब्रदरहुड, गीता परिवार और इस्कॉन की स्थापना में मदद की. पुणे में देखे जानेवाले कई बिल्डरों में गोयल गंगा उनकी प्रेरणा हैं. जयप्रकाशजी हमारे समाज में इस व्यवसाय को शुरू करने वाले पहले व्यक्ति थे. इसके बाद हमारे समाज के 15 से 20 प्रतिशत लोग इस व्यवसाय में आए. जयप्रकाश जी ने बहुत सारा सामाजिक कार्य किया. जरूरतमंदों की मदद की. उन्होंने स्कूल बनाए, आईटी पार्क, आवासीय और वाणिज्यिक निर्माण भी किए. पुणे में प्रसिद्ध परियोजना गंगाधाम के निर्माण में उनका प्रमुख योगदान है. उनके दोनों बच्चे अच्छा काम कर रहे हैं. जयप्रकाश जी के निधन से समाज को बड़ी क्षति हुई है. मुझे लगता है कि यह उनका ही योगदान है कि उन्होंने सभी भाइयों की मदद कर गोयल गंगा ब्रांड को शहर में सफल बनाया.
 
- कृष्णकुमार गोयल, अध्यक्ष, कोहिनूर ग्रुप
 
 
अग्रवाल समाज के लोगों को जोड़ा
 
 
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उन्होंने कड़ी मेहनत से साम्राज्य खड़ा किया. ब्रदरहुड फाउंडेशन की स्थापना की. सभी अग्रवाल समाज के लोगों को एक साथ लाना एक बड़ा काम था. इस प्रकार हम एक दूसरे को बेहतर तरीके से जान पाए. ब्रदरहुड की स्थापना के बाद शहर में कई अन्य क्लबों की स्थापना हुई. कुल मिलाकर, अग्रवाल समाज में इन अच्छी चीजों की शुरुआत उन्होंने ही की थी. जयप्रकाशजी हमारे समाज में कंन्स्ट्रक्शन व्यवसाय में पहले उद्योगपति थे. सबके साथ प्रेम से रहनेवाले, विनम्र, प्यार से बोलना यह उनकी पहचान थी. मेरी उनसे ब्रदरहुड के कार्यक्रम में पहले मुलाकात होती रहती थी. जब हमने द एस क्लब शुरू किया तो हमने उनका मार्गदर्शन मांगा. उन्होंने कहा था कि एक ही क्लब में ज्यादा सदस्य नहीं हो सकते. इसलिए उनका मानना था कि नए क्लबों का गठन जारी रहना चाहिए. उन्होंने सराहना करते हुए कहा कि इससे समाज के लोगों को मिलने-जुलने में मदद मिलेगी.
 
- नरेश मित्तल, निदेशक, मित्तल ग्रुप
 
   
उन्होंने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया
 
 
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वे एक बहुत ही मिलनसार व्यक्ति थे  और समाज में रहना पसंद करते थे. निर्माण व्यवसाय में इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी वे जमीन से जुड़े व्यवसायी के रूप में जाने जाते थे. वे सादगी से रहते थे, कम और अच्छा बोलते थे, तथा उनका स्वभाव शांत था. मैंने उन्हें कभी क्रोधित या परेशान नहीं देखा. उन्होंने समाज के किसी वर्ग और किसी स्तर के लोगों के साथ कभी भेदभाव नहीं किया. उनका सबसे बड़ा गुण था, हर किसी से खुलकर बात करने की उनकी क्षमता और खुश रहना. उनके निधन से अपूरणीय क्षति हुई है. हम अक्सर मिलते और उनसे सामाजिक चर्चा होती. वे बहुत सारी अच्छी बातें बताते थे. वे इस बात पर विचार करते थे कि अगली पीढ़ी को संस्कारित कैसे किया जाए. वे हमेशा चाहते थे कि नई पीढ़ी भी कड़ी मेहनत करे और सफलता प्राप्त करे.
 
- राजकुमार बंसीलाल अग्रवाल
 
आपकी शख्सियत को हजारों प्रणाम ‌
 
 
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‘वो आदमी है, तो हुआ कीजे वो आदमी रहे, दुआ कीजे, सिर्फ होने से कुछ नहीं होता, अपने होने का हक अदा कीजे...‌’ जयप्रकाशजी का व्यक्तित्व ऐसा ही था. संस्कार, परिवार, व्यवहार और व्यापार. सभी जगह अव्वल, जिनसे लोग प्रेरणा लें. मैंने हरदम उनमे एक वो बुजुर्ग देखा, जो मितभाषी, पूछो तो राय देनेवाला, हर बार प्रोत्साहित करनेवाला और सदा एक चिरपरिचित मुस्कान, अपने साथ रखनेवाला. धरम में आस्था, करम में वेिशास, मैंने सदा आदरणीय जयप्रकाश जी में देखा. सामाजिक दायित्व को समझते हुए उसमें भी अपना भरपूर योगदान दिया और इस परंपरा को आगे चलाने के लिए अपने बेटों अतुल और अमित को भी तैयार किया, यह विशेष सराहनीय बात. जयप्रकाशजी आपको सदियों तक याद किया जाएगा. आपके अच्छे कार्यों को याद रखा जाएगा. आपकी छवि को हम भूल नहीं पाएंगे. आपकी शख्सियत को हजारों प्रणाम. मेरी और मेरे परिवार की आपको आदरांजलि.
 
- द्वारकाप्रसाद जालान